अनुपमा चतुर्वेदी
अनुपमा चतुर्वेदी समकालीन हिन्दी साहित्य की एक सक्रिय और बहुआयामी लेखिका हैं। विगत सत्ताईस वर्षों से वे कुवैत में निवासरत हैं। यहाँ वे अपनी हस्तनिर्मित जूलरी Jewels by Shonn तथा इंटीरियर डेकॉर की नायाब वस्तुओं की Makramiyat By Shonn जैसी प्रतिष्ठित ब्रांड्स की संस्थापक हैं।
साहित्य के क्षेत्र में, आप अंतरराष्ट्रीय महिला काव्य मंच, कुवैत इकाई की अध्यक्ष व अंतरराष्ट्रीय प्रहरी काव्य मंच और राइटर्स फोरम कुवैत की स्थायी सदस्य हैं। नव उदय जैसे कई सम्मानों से सम्मानित हैं । आपकी कविताएँ, लेख और कहानियाँ डिजिटल व प्रिंट मीडिया में प्रकाशित होती रहती हैं। आपकी एक कविता ‘प्रधान सेवक – मोदी जी’ भारतीय जनता पार्टी की सांसद व राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमती मीनाक्षी लेखी जी द्वारा कुवैत के एक मंच से पढ़ी गई।
अनुपमा, कुवैत में अनेक साहित्यिक व सामाजिक मंचों पर निर्णायक और मुख्य अतिथि रह चुकी हैं। समाज में हिन्दी के प्रति जागरूकता फैलाना तथा विदेशों में हिन्दी को लोकप्रिय बनाना उनका उद्देश्य है। उनका यू-ट्यूब चैनल ‘मेरी ख़ामोशियाँ’ उनकी सृजनात्मक अभिव्यक्ति का सजीव माध्यम है।
आप लखनऊ विश्वविद्यालय से मार्केटिंग, इक्नॉमिक्स एवं मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर हैं तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक। आप प्रोफेशनल इंटीरियर डिज़ाइनर के साथ ही हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में स्नातक भी हैं । आप जूलरी डिज़ाइनर, मैक्रमे व पेपर फिलिग्री (क्विलिंग) कलाओं की प्रवीण आर्टिस्ट हैं साथ ही भारतीय पारंपरिक कला- रंगोली लगाना भी इनकी रुचियों में से एक है।
कुवैत में आपने ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर व मार्केटिंग मैनेजर जैसे पदों पर यहाँ की प्रतिष्ठित कॉम्पनियों में कार्य किया। वर्तमान में कुवैत में अपना बिज़नेस सफलतापूर्वक चला रहीं हैं। आपकी हस्तकला के बहतरीन ज़ेवर व डेकॉर प्रोडक्टस की प्रदर्शनियाँ लगतीं हैं। ये प्रोडक्टस इनके ऑनलाइन स्टोर www.makramiyat.com पर सभी देशों में उपलब्ध हैं ।
मेरी ख़ामोशियाँ
मेरी ख़ामोशियाँ मेरी काव्य रचनाओं का पहला काव्य संग्रह है। इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इन कविताओं में मैंने वे सभी भाव व्यक्त करने की चेष्टा की है, जो सामान्यतः हम कहने में झिझकते हैं। इसलिए किताब का शीर्षक ‘मेरी ख़ामोशियाँ’ उपयुक्त लगा। कविताएँ और उनके सन्दर्भ में लिखे लघु लेख मेरी कल्पना से उपजे मेरे अपने विचार हैं। किसी भी भावना को एकांतता दे, छिपाने का प्रयास नहीं किया है। ज़िन्दगी के कई पड़ावों से प्रेरणा लेकर लिखने की हिम्मत की है।
पुस्तक के तीन मुख्य भाग हैं, पहला मेरी ख़ामोशियाँ जो मेरी पछत्तर कविताओं का संग्रह है। दूसरे भाग महफ़िल ए खामोशी में, उर्दू भाषा जो मुख्यतः मेरे मायके लखनऊ-अवध से उपजी मानी जाती है, उसकी नज़ाकत का लुत्फ़ लेकर कुछ नज़्में और गीत संग्रहित हैं। तीसरे भाग ख़याल ए ख़ामोशी में बस चार पंक्तियाँ मेरे जज़्बात और ख़यालों की पेशे ख़िदमत हैं।
काव्य रचनाओं में हर नवरस का स्पर्श कर कुछ भावनाओं को, जैसे माँ की ममता, प्रेयसी के उद्गार, सामान्य रिश्तों के फूलों की खुशबू, राष्ट्रवाद और जीवन दर्शन को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। किन्हीं कविताओं में कथाएँ भी बुनीं। हर कविता के साथ उसी विचार से संबंधित एक लघु लेख है, ‘कलम की मनोदशा’ जो मेरी और मेरी क़लम की उस समय की मनोदशा को दर्शाता है, जब वह कविता उत्पन्न हुई थी। हर लेखक की रचनाओं को गढ़ने और उसे प्रस्तुत करने की पृथक शैली होती है। मुझे कविता के साथ-साथ उसका संदर्भ भी आपसे साँझा करना भाता है। किन्तु यह तो पाठक की इच्छा पर निर्भर है, चाहे तो ‘कलम की मनोदशा’ को पढ़ कर कविता पढ़ें अथवा सीधे कविता पाठ करें ।
यह आवश्यक नहीं कि कवि ने उन सभी परिस्थितियों का साक्षात्कार स्वयं ही किया हो जो कविता लेखन की प्रेरणा रहीं हों। वह किसी दूसरे व्यक्ति की परिस्थिति को समझ, उसके भावों को उसी के दृष्टिकोण से देख कर भी अपनी रचनाएँ गढ़ सकता है। यही कविता की सबसे बड़ी चुनौती होती है और एक माप दंड भी, जिस पर कवि की भावाभिव्यक्ति को परखा जा सकता है। अपने आस-पास और सुदूर बसे अनेक प्रियजनों की भावनाओं और जीवन परिस्थितियों ने मुझे भी प्रेरित किया इन में से कुछ कविताएँ लिखने के लिए। मेरे यू ट्यूब चैनल मेरी ख़ामोशियाँ पर इन कविताओं के वीडियोज़ मेरी आवाज़ में प्रस्तुत हैं।
जल्द उपलब्ध होगी
Testimonials